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Cow Death due to Lumpy : लम्पी के सामने लम्पट व्यवस्था

facebook, twitter, कोरोना से खतरनाक लम्पी सनातन धर्म में गाय का प्रमुख स्थान है। गाय में सक्षात श्री हरि विष्णु का वास हाेता है। इसके अलावा सभी देवी-देवता का निवास होता है। भारत देश जहां स्चयं श्री कृष्ण गाय की सेवा करते थे उस देश में राेज हजारों गायों का मौत के मुंह में जाने पर सरकारों की चुप्पी समझ से परे है। ये भी पढ़े :  गाय में जो रोग है, उसकी दवा गाय के शरीर में ही उपलब्ध एक किसान के लिए पशु का क्या महत्व होता है वह इस बात से समझा जा सकता है कि जब कभी शाम को वक्त पर घर न पहुंचे तो मन में अनहोनी का आभास होने लगता है। ऐसे में लाखों गायों की मौत पर सब मौन क्यों? अकेले राजस्थान में 75 हजार गाय और बछड़े मौत के मुंह में समा चुके है। लम्पी से होने वाली मौत के मामले में गुजरात, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, हिमाचल, हरियाणा और बाकी राज्य भी पीछे नहीं है जहां लम्पी गायो को निगल रही है। ये भी पढ़े :  Global Warming effect on Amarnath Shivling : अमरनाथ शिवलिंग पर ग्लोबल वार्मिंग का प्रभाव गायों की मौन-चीत्कार लम्पी वायरस का कोई इलाज नहीं है और न ही कोई टीका है। हजारों गायें रोज धरती मां क...

Lumpy Skin Disease : लम्पी का उपचार पुरी शंकराचार्य जी द्वारा

facebook, twitter, गाय में जो रोग है, उसकी दवा गाय के शरीर में ही उपलब्ध कोरोना के बाद कई नई बीमारियां सामने आ रही हैं। पहले मंकीपॉक्स और अब लंपी वायरस ने लोगों को चिंता में डाल दिया है। गुजरात-राजस्थान और पंजाब के अंदर पशुओं में तेजी से फैल रहे इस वायरस ने गायों समेत हजारों जानवरों की जान ले ली है। ये भी पढ़े :  अमरनाथ शिवलिंग पर ग्लोबल वार्मिंग का प्रभाव किस तरह का संक्रमण है लंपी लंपी स्किन रोग एक संक्रामण रोग है। जो वायरस की वजह से तेजी से फैलता है और कमजोर इम्यूनिटी वाली गायों को खासताैर पर प्रभावित करता है। फिलहाल इस रोग का कोई ठोस इलाज नहीं है। ये भी पढ़े : तीर्थ स्थलों का व्यापारीकरण कैसे फैलता है संक्रमण और क्या है बचाव लंपी वायरस संक्रमण मच्छर-मक्खी और चारा के साथ संक्रमित मवेशी के संपर्क में आने से भी फैलता है। जिस भी गाय को लम्पी रोग हुआ हो उस गाय का गोमूत्र व गोबर और मठ्‌ठा तीनों पदार्थ मिलाकर उसमें और पानी मिलाकर गाय को स्नान कराने से रोग का निवारण हो जाता है। गाय के शरीर में जो रोग होता है उसकी दवा भी गाय के शरीर में उपलब्ध है। ये भी पढ़े : इलेक्ट्रिक वाहन : ग्लोबल वार्...

Global Warming effect on Amarnath Shivling : अमरनाथ शिवलिंग पर ग्लोबल वार्मिंग का प्रभाव

facebook, twitter, अमरनाथ शिवलिंग पर ग्लोबल वार्मिंग का प्रभाव क्लाइमेट चेंज और ग्लोबल वार्मिंग का असर न केवल यूरोप तक सीमित है, बल्कि अब इसका असर भारत में अमरनाथ गुफा तक भी पहुंच रहा है। जिसके कारण अमरनाथ का शिवलिंग वक्त से पहले पिघल रहा है। हर साल करीब एक महीने के लिए अमरनाथ के शिवलिंग के दर्शन होते थे। वहीं अब पिछले कुछ वर्षो से शिवलिंग बहुत जल्दी पिघलने लगा है, जिससे बाबा बर्फानी के दर्शन वाले दिन घटकर सिर्फ 20 दिनों में सिमट रहा है। ये भी पढ़े :  Chardham: pilgrimage or tourist destination चारधाम : तीर्थस्थल या पर्यटनस्थल अमरनाथ यात्रियों के लिए बर्फ के शिवलिंग के दर्शन और दुलर्भ होता जा रहा है। क्योंकि जो शिवलिंग पहले एक महीने तक नहीं पिघलता था, अब वह यात्रा शुरू होने के मात्र 3 हफ्ते के अंदर ही पिघलने लगा है। साल-दर-साल कम होता गया शिवलिंग का आकार आपको जानकर हैरानी होगी कि जो शिवलिंंग 90 के दशक में 20 फीट तक ऊंचा बनता था। लेकिन 2012 में इसकी ऊंचाई 18 फीट तक पहुंच गई। तो वहीं 2015 में अमरनाथ धाम में 18 फीट का शिवलिंग बना। 2016 तक आते-आते शिवलिंग की ऊंचाई 10 फीट तक सिमट गई। उस...

Chardham: pilgrimage or tourist destination चारधाम : तीर्थस्थल या पर्यटनस्थल

facebook, twitter, तीर्थ स्थलों का व्यापारीकरण हिन्दु सनातन धर्म में चार धाम यात्रा का बहुत महत्व है। चार धामों के दर्शन करने से हर तरह के पाप खत्म हो जाते हैं और सकारात्मक ऊर्जा भी बढ़ती है। बीते दो सालों से काेरोना के कारण स्थगित यह यात्रा 2022 में फिर से शुरू हुई। कोरोना महामारी का प्रकोप कम होने के बाद देश भर के धार्मिक स्थलों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है, क्योंकि कोरोना काल में प्रतिबंधों काे झेलने के बाद हर कोई यात्रा के लिए उत्सुक भी है। श्रद्धालु यात्रा के लिए उत्सुक दिखाई पड़ते है और अपनी आस्था को भगवान के प्रति समर्पित करना चाहते है। इस वर्ष अब तक लाखों श्रद्धालु यह यात्रा पूरी कर और सुनहरी यादों को लेकर अपने घरों को लौट चुके है। इस यात्रा को इन लोगों ने क्या यादगार दिया इस पर भी विचार करना आवश्यक है। अभी इस यात्रा काे शुरू हुए एक महीना भी नहीं हुआ लेकिन केदारनाथ जाने वाले रास्ते पर प्लास्टिक और कचरे के ढेर नजर आने लगे। केदारनाथ जैसे संवेदनशील स्थान पर जिस तरह प्लास्टिक का कचरा जमा हो गया है। वह हमारी पारिस्थितिकी के लिए खतरनाक है। इससे क्षरण होगा जो भूस्खलन का कारण ब...

पर्यावरण संरक्षण : अभी नहीं तो कभी नहीं

facebook, twitter, पर्यावरण संरक्षण : अभी नहीं तो कभी नहीं सिर्फ पृथ्वी पर ही जीवन संभव है। Only One Planet In The Entire Universe ... उसे बचाना ही होगा। आज हम विश्व पर्यावरण दिवस की 50 वीं सालगिरह बना रहें है। पांच दशक पहले स्टॉकहोम में साल 1972 में 5 से 16 जून तक पर्यावरण पर दुनिया का पहला अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन हुआ था। उसके दो साल बाद 5 जून 1974 में दुनिया के 119 देश प्रकृति को बचाने और पर्यावरण से जुड़े मुद्दों को हल करने की भावना से एकजुट हुए, और तब पहली बार 'केवल एक पृथ्वी' Only One Earth के स्लोगन के साथ पर्यावरण दिवस मनाया गया। ये भी पढ़े :  इलेक्ट्रिक वाहन : ग्लोबल वार्मिंग की समस्या का समाधान पर्यावरण दिवस मनाने का लक्ष्य पर्यावरण को बचाने की चुनौती से निपटने के लिए एक बुनियादी सामूहिक दृष्टिकोण बनाना था। तब से हर साल 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस के रूप नामित किया गया। आज हमारी पृथ्वी संकट में है, इसका सुरक्षा कवच यानी ओजोन लेयर छिन्न-भिन्न हो गई है। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार दुनिया भर में प्राकृतिक आपदाओं की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। जिसका असर हमा...

ग्लोबल वार्मिंग की समस्या के समाधान में कितने सहायक है इलेक्ट्रिक वाहन?

facebook, twitter, इलेक्ट्रिक वाहन : ग्लोबल वार्मिंग की समस्या का समाधान विश्व पर्यावरण दिवस हर साल 5 जून को मनाया जाता है। इसको मनाने का मुख्य उद्देश्य लोगों के मध्य पर्यावरण के प्रति जागरूकता पैदा करना है। यह पूरे विश्व में मनाया जाता है तथा लोगों को यह बताया जाता है कि हमें पर्यावरण को बचाने के लिए हर संभव कदम उठाने चाहिए, जिनसे पर्यावरण को कोई नुकसान न पहुंचे। ये भी पढ़ें -  निर्जला एकादशी का महत्व पर्यावरणीय प्रदूषण को कम करने की दिशा में एक कदम उठाए जा रहे हैं। आज जब दुनियाभर में भारी कार्बन उर्त्सजन के कारण ग्लोबल वार्मिंग और पर्यावरणीय प्रदूषण का खतरा बढ़ता जा रहा है, तो ऐसे में दिल्ली सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों को उसके समाधान के रूप में प्रस्तुत कर रही है। भारत सरकार भी परम्परागत वाहनों की जगह इलेक्ट्रिक वाहन लाने की नीति बना चुकी है। लेकिन प्रश्न यह उठता है कि क्या इलेक्ट्रिक वाहन पर्यावरणीय प्रदूषण की समस्या का समाधान कर सकता है? ये भी पढ़ें -  विज्ञापनों में हमेशा हिंदु त्याेहारों से छेड़छाड़ क्याें? आज प्रत्यक्ष कार्बन डाई-ऑक्साइड उत्सर्जन में परिवहन क्षेत्र का हिस्सा 25 ...

निर्जला एकादशी का महत्व

facebook, twitter, निर्जला एकादशी का महत्व हिंदु धर्म के अनुसार एकादशी के व्रत का विशेष महत्व होता है। साल में 24 एकादशी आती है, और सभी का अपना अलग-अलग महत्व होता है।  कुछ एकादशी के व्रत ऐसे होते है, जिनका खास महत्व होता है और इन्हीं में से एक है निर्जला एकादशी का व्रत। हिंदु कैलेंडर के अनुसार ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष में निर्जला एकादशी का व्रत रखा जाता है। निर्जला एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना की जाती है, और व्रत रखा जाता है। इस साल निर्जला एकादशी 10 जून सुबह 7:25 बजे से प्रारंभ होगी और अगले दिन यानी 11 जून सुबह 5:45 बजे समापना होगा। ये भी पढ़ें -  अक्षय तृतीया में क्या न करें, जिससे हो मां लक्ष्मी की कृपा आखिर क्यों हैं निर्जला एकादशी व्रत का विशेष महत्व हिन्दु मान्यताओं के अनुसार निर्जला एकादशी का व्रत सबसे श्रेष्ठ है और ये सबसे कठिन व्रतों में से एक है। इस व्रत में अन्न और जल का त्याग किया जाता है। ऐसा माना जाता है कि जो भी व्यक्ति यह व्रत विधिपूर्वक करता है, उसे जीवन में हमेशा सुख-शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है। ये भी ...

अक्षय तृतीया में क्या न करें, जिससे हो मां लक्ष्मी की कृपा

facebook, twitter, अक्षय तृतीया में क्या न करें, जिससे हो मां लक्ष्मी की कृपा अक्षय तृतीया का दिन सबसे शुभ दिनों में से एक माना जाता है। इस दिन बिना मुहूर्त देखे शादी, मुंडन, घर - गाड़ी की खरीदारी, गृह प्रवेश, नए काम की शुरूआत जैसे शुभ काम किए जाते है। इस दिन किसी भी चीज की खरीदारी करने के लिए बेहद शुभ माना जाता है। इस साल अक्षय तृतीया 3 मई को मनाई जाएगी। वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को अक्षय तृतीया और आखा तीज के नाम से जाना जाता है। ये भी पढ़ें -  अक्षय से पहले ये सितारे भी एड के लिए मांग चुके है माफी अक्षय तृतीया के दिन कई लोग दान धर्म करते है। इसका बहुत बड़ा महत्व है, ऐसा माना जाता है कि इस दिन दान-पुण्य करने से घर में सुख-समृद्धि आती है। इसके साथ ही जीवन के सभी दुख दूर होते है। जिस कारण घर में धन-धान्य की कमी भी नहीं होती है, और साथ ही भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी का आशीर्वाद बना रहता है। ये भी देखें -  #AkshayTritiya | अक्षय तृतीया में क्या न करें | कब है अक्षय तृतीया अगर आप चाहते है कि आपके घर-परिवार में मां लक्ष्मी का वास सदैव बना रहे इसके लिए आपको अक्षय तृतीया ...

अक्षय से पहले ये सितारे भी एड के लिए मांग चुके है माफी

facebook, twitter, अक्षय से पहले ये सितारे भी एड के लिए मांग चुके है माफी विज्ञापन का उपभोक्ताओं के जीवन में काफी महत्व है। हम किसी चीज को तब तक नहीं खरीदते है, जब तक उसका विज्ञापन संतोषजनक न लगे। इसलिए कपंनियां अपने विज्ञापनों में काफी खर्चा करने के साथ ही कई और तरह के हथकंडे अपनाती है। जिसके कारण ही कंपनी अपने विज्ञापनों में बॉलीवुड के कई सितारों को एड के जारिए बाजार में उतारती है। ये सितारे भी विज्ञापन कर मोटी कमाई करते है। ये फेमस एक्टर काफी हद तक उपभोक्ताओं को बरगलाने में कामयाब साबित होते है। जैसे फेयरनेस क्रीम का यह कहना कि इसे लगाने से त्वचा का रंग गोरा होगा या फिर किसी एड का यह दावा करना कि इसे खाने से आपको कोरोना नहीं होगा। तो वहीं कई बार इन विज्ञापनों का दावा उन्हीं पर भारी पड़ा है। ये भी पढ़ें - पुष्पराज बोलेगा नहीं - 'बोलो जुबां केसरी' विज्ञापन कर बुरे फंस चुके है ये सितारें आज हम बॉलीवुड के उन सितारों की बात करेंगें जो विज्ञापन से मोटी कमाई तो करते है, लेकिन इनकी वजह से सोशल मीडिया पर काफी ट्रोल भी हो चुके है। जिसके कारण या तो उन्हें एड से हाथ धोना पड़ा है या फिर कोर...

पुष्पराज बोलेगा नहीं - 'बोलो जुबां केसरी'

facebook, twitter, पुष्पराज बोलेगा नहीं - 'बोलो जुबां केसरी' अजय देवगन और शाहरुख खान के बाद अब बॉलीवुड के खिलाड़ी ने भी पान मसाला की दुनिया में एंट्री ले ली है। पैसों के लिए लोग कितना गिर सकते है, यह बात बॉलीवुड के खिलाड़ी ने साबित कर दी है। कल तक जो अक्षय कुमार पान-मसाला, गुटखा, सिगरेट का खुलकर विरोध कर रहे थे, आज वही अक्षय कुमार पैसों के आगे झुक गए है। जिसे लेकर सोशल मीडिया पर उन्हें खूब ट्रोल किया जा रहा है, क्योंकि अक्षय बॉलीवुड के सबसे बड़े फिटनेस फ्रीक्स में से एक है। ऐसा इसलिए, क्योंकि अक्षय ने अपने कई इंटरव्यूज में कहा था कि गुटखा कंपनियां उन्हें करोड़ों के ऑफर देती हैं लेकिन वे उन्हें स्वीकार नहीं करते।   ये भी पढ़ें -  विज्ञापनों में हमेशा हिंदु त्याेहारों से छेड़छाड़ क्याें? अजय देवगन की तरह ही अक्षय कुमार का भी यही कहना है कि वह विमल इलाइची का ऐड कर रहें है न की पान मसाला का। लेकिन क्या उनका इतना कहना काफी है कि क्योंकि कोई कंपनी करोड़ों रुपये केवल इलायची का ऐड करने के लिए तो नहीं देगी। जो कंपनी अजय, शाहरुख और अब अक्षय को एक ही ब्रांड के विज्ञापन में साथ में ला रही है, वह ...

विज्ञापनों में हमेशा हिंदु त्याेहारों से छेड़छाड़ क्याें?

विज्ञापनों में हमेशा हिंदु त्याेहारों से छेड़छाड़ क्याें? त्योहारी सीजन के आते ही हर कंपनी कई लुभावने विज्ञापन जारी करती है, और तरह-तरह के ऑफर्स देकर अधिक-से अधिक मुनाफा कमाना चाहते है। इस होड़ में कई विवादस्पद विज्ञापन भी जारी करती हैं। हाल के दिनों में आए कई विज्ञापनों में हिन्दु त्योहारों का मजाक उड़ाते हुए दिखाया गया है।  ये भी पढ़ें -  मिडिल क्लास अबायी इन दिनों डाबर कंपनी के एक विज्ञापन को लेकर सोशल मीडिया पर लोग अपना गुस्सा उतार रहें है। इस विज्ञापन में डाबर के प्रोडक्ट फेम को लेकर है, जिसमें एक समलैंगिक जोड़े को करवा चौथ मनाते हुए दिखाया गया हैं। इस विज्ञपान को देखने के बाद सोशल मीडिया पर कंपनी के खिलाफ गुस्सा फूट पड़ा, और लोगों ने नाराजगी जाहिर करते हुए, पूछा कि हमेशा हिन्दु त्योहारों से ही छेड़छाड़ क्यों किया जाता है? मुस्लिम या ईसाई त्योहारों से क्यों नहीं? आपको बता दें कि डाबर के इस विज्ञापन में एक महिला दूसरी महिला को क्रीम लगाते हुए दिखाई दे रही है। इसके बाद वो कहती है, “ये लग गया तेरा फेम क्रीम गोल्ड ब्लीच।” इस पर दूसरी महिला जवाब देती है, “धन्यवाद! तुम सबसे अच्छी हो।” इ...

मिडिल क्लास अबायी (MCA)

मिडिल क्लास अबायी आज हमारे घर पर मेहमानों की भीड़ लगी हुई है। सभी लोग जोड़े काे उपहार और आगे के जीवन के लिए शुभकामनाएं दे रहे है। दूल्हा और दुल्हन एक दूसरे को देखकर शर्मा रहे है। थोड़ा ठहरिए जैसा आप लोग सोच रहे है यह कोई शादी समारोह... नहीं है। ये जो सामने मंच पर आपको दूल्हा-दुल्हन दिखाई दे रहे है वो मेरे दादा-दादी है, और मैं उनका पोता रतन कुमार। आज मेरे दादाजी की शादी की 50वीं वर्षगांठ है और इसी के उपलक्ष्य में ये उत्सव मनाया जा रहा है। हमारी फैमिली एक "मिडिल क्लास फैमिली" है। इस समारोह में किसी ने दादाजी से पूछ लिया कि मिडिल क्लास होना वरदान है या अभिशाप? यह सवाल सुनकर हॉल में सन्नाटा छा गया क्योंकि वह सज्जन स्वयं एक मिडिल क्लास फैमिली से संबंध रखते है। इस सवाल पर दादाजी का जवाब सुनने की उत्सुकता सभी लोगों में बढ़ती जा रही है। फिर दादाजी ने अपने जीवन के अनुभव हम सभी लोगो के साथ साझा करते हुए बाेलने लगे- मिडिल क्लास को कभी बोरियत नहीं होती है  यही उनका सबसे बड़ा वरदान है।  जिदंगी भर कोई-न-कोई आफत लगी रहती है।  इनके नसीब में न तो तैमूर जैसा बचपन हाेता है और  न ही अनूप जलो...

सौ फीसदी अंक, क्या देते है नौकरी की गरंटी?

facebook, twitter, सौ फीसदी अंक, क्या देते है नौकरी की गरंटी?  रोशनी आज बहुत खुश है और थोड़ी बेचैन भी क्योकि कल उसका प्रतियोगी परीक्षा का परिणाम आने वाला है। कल उस सपने का सकार  होने का दिन है जो सपना उसके माता - पिता ने उसके पैदा होने से पहले से देखते आ रहे है। उसके पैदा होने के बाद उस सपने को रोशनी की जिंदगी का लक्ष्य बना दिया गया। कुरूक्षेत्र में एक योद्धा की तरह रोशनी भी अपने लक्ष्य को प्राप्त करने में सर्वश्व न्यौछावर कर चुकी है। वो बचपन से लेकर आज तक सभी परीक्षाओं में प्रथम आई है। इस सरकारी नौकरी की परीक्षा को पास करने के लिए वो पिछले दो साल से तैयारी कर रही है। जो लड़की हर काम हमेशा अपने समय से करती थी, आज उसे नींद नहीं आ रही है। कल क्या परिणाम आयेगा इसी उधेड़बुन में सुबह हो गयी। घड़ी की सुई परिणाम के आने का इशारा कर रही थी। परिणाम देखकर उसे विश्वास नहीं हो रहा कि उसके पूरे सौ फीसदी अंक आये है। दो महीने बाद अंतिम चयन सूची घोषित हुई तो उसका नाम नहीं था। सामान्य श्रेणी का उम्मीदवार किसी नौकरी के लिए लिखित परीक्षा में सौ फीसदी अंक प्राप्त करता है तो भी इस बात की गरंटी नहीं है...

भारत में हाइपरलूप तकनीक की उपयोगिता

भारत में हाइपरलूप तकनीक की उपयोगिता हाइपरलूप क्या है? हाइपरलूप वाहनों का विचार परिवहन के पांचवें विकल्प के तौर पर सामने आया है। हाइपरलूप वैक्यूम  ट्यूब के अंदर वाहन चलाने की अवधारणा है। जिसमें हवा और अन्य प्रतिरोध कम होने के चलते वाहन को कम उर्जा में तीव्रतम गति से चलाया जा सकता है। पूरी दुनिया में लोग इस त्वरित और ज्यादा सुरक्षित परिवहन को व्यावहारिक बनाने में काम कर रहे ंहै।  आत्मनिर्भर भारत की ओर बढ़ते कदम   IIT Madras के Centre for Innovation के  'AVISHKAR'  हाइपरलूप टीम इस दिशा अग्रणी कही जा सकती है।  'AVISHKAR' एकमात्र एशियाई टीम है जो भारत में स्वचलित हाइपरलूप पॉड के स्वदेशी डिजाइन और विकास पर काम कर रही है। इस टीम ने 2019 में अंतरराष्ट्रीय स्पेसएक्स हाइपरलूप पॉड प्रतियोगिता में फाइनल में पहुंची थी। 19 जुलाई से शुरू हुई यूरोपियन हाइपरलूप वीक में टीम  'AVISHKAR' हाइपरलूप भाग ले रही है। इस प्रतियोगिता के लिए 40 छात्रों की टीम ने कोरोना महामारी के दौरान नवीन प्रोटाेटाइप हाइपरलूप पॉड विकसित किया है। यह पॉड चेन्नई से बेंगलूरु की दूरी मा...

सावन मास का महत्व

सावन मास का महत्व सावन मास भगवान शिव को समर्पित हैं। इस पवित्र महीने में भोले बाबा के भक्त उन्हे प्रसन्न करने के लिए विशेष पूजा अर्चना करते है। सावन मास को सर्वोत्त्म मास भी कहते है। सावन सोमवार व्रत का सर्वाधिक महत्व है। श्रावस मास भगवान भोलेनाथ को सबसे प्रिय है। इस माह में सोमवार का व्रत और सावन स्नान की परंपरा है। श्रावण मास में बेलपत्र से भगवान भोलेनाथ की पूजा करना और उन्हें जल चढ़ाना अति फलदायी माना गया है। जल अभिशेष का सावन मास में विशेष   महत्व   जब   समुद्र मंथन आरम्भ हुआ और भगवान कच्छप के एक लाख   योजन   चौड़ी पीठ पर मन्दराचल पर्वत घूमने लगा। तब समुद्र मंथन से सबसे पहले हलाहल विष निकला। उस विष की ज्वाला से सभी देवता तथा दैत्य जलने लगे और उनकी कान्ति फीकी पड़ने लगी। इस पर सभी ने मिलकर भगवान शंकर की प्रार्थना की। उनकी प्रार्थना पर   महादेव   जी उस विष को हथेली पर रख कर उसे पी गये किन्तु उसे कण्ठ से नीचे नहीं उतरने दिया। उस   कालकूट   विष के प्रभाव से शिवजी का कण्ठ नीला पड़ गया। इसीलिये महादेव जी को   नीलकण्ठ   कहते हैं। उ...

भारतीय आयुर्विज्ञान काढ़े तक ही सीमित है?

facebook, google+ भारतीय आयुर्विज्ञान काढ़े तक ही सीमित है ? कोविड महामारी को 1 साल से अधिक समय हो गया है और ये भी स्पष्ट हो चुका है कि कोविड विषाणु देश काल के अनुसार अपनी संरचना बदलते हुए मारक बना हुआ है। इसके नियंत्रण के लिए देश काल के अनुसार प्रोटोकाॅल की जरूरत है। कोरोना संक्रमण के तेज फैलाव और इसके वैश्विक महामारी बनने के पीछे आवागमन के साधनों का विकास जिसके कारण पूरा विश्व एक प्रांत की तरह होना भी है। आयुर्वेद शब्द ( आयु : + वेद ) से मिलकर बना है जिसका अर्थ है जीवन से संबंधित ज्ञान। आयुर्विज्ञान मानव शरीर को निरोग रखने , रोग हो जाने पर रोग से मुक्त   करने तथा आयु बढ़ाने वाला है। आयुर्वेद के आदि आचार्य अश्विनी कुमार माने जाते है। धनवंतरी जयंती या धनतेरस को राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस मनाया जाता है। धनवंतरी जी को सनातन धर्म के अनुसार औषधि का देवता माना जाता है। आयुर्वेद के आचार्यो ने महामारी का मुख्य कारण जलवायु प्रदूषण को बताते है। जिससे अनाज , फल , सब्जियों और औषधियों वनस्पतियों के गुण कम हो जाते है। जल एवं वायु जीवन का प्रमुख आधार है इसलिए पर्यावरण में जलवायु के विकृत होने प...