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भारत में हाइपरलूप तकनीक की उपयोगिता

भारत में हाइपरलूप तकनीक की उपयोगिता



हाइपरलूप क्या है?

हाइपरलूप वाहनों का विचार परिवहन के पांचवें विकल्प के तौर पर सामने आया है। हाइपरलूप वैक्यूम 
ट्यूब के अंदर वाहन चलाने की अवधारणा है। जिसमें हवा और अन्य प्रतिरोध कम होने के चलते वाहन को कम उर्जा में तीव्रतम गति से चलाया जा सकता है। पूरी दुनिया में लोग इस त्वरित और ज्यादा सुरक्षित परिवहन को व्यावहारिक बनाने में काम कर रहे ंहै। 



आत्मनिर्भर भारत की ओर बढ़ते कदम  

IIT Madras के Centre for Innovation के  'AVISHKAR'  हाइपरलूप टीम इस दिशा अग्रणी कही जा सकती है।  'AVISHKAR' एकमात्र एशियाई टीम है जो भारत में स्वचलित हाइपरलूप पॉड के स्वदेशी डिजाइन और विकास पर काम कर रही है। इस टीम ने 2019 में अंतरराष्ट्रीय स्पेसएक्स हाइपरलूप पॉड प्रतियोगिता में फाइनल में पहुंची थी। 19 जुलाई से शुरू हुई यूरोपियन हाइपरलूप वीक में टीम  'AVISHKAR' हाइपरलूप भाग ले रही है। इस प्रतियोगिता के लिए 40 छात्रों की टीम ने कोरोना महामारी के दौरान नवीन प्रोटाेटाइप हाइपरलूप पॉड विकसित किया है। यह पॉड चेन्नई से बेंगलूरु की दूरी मात्र 30 मिनट में तय कर सकता है।



भारत में हाइपरलूप परिवहन की वर्तमान स्थिति

  • महाराष्ट्र सरकार ने वर्जिन हाइपरलूप वन को मुंबई से पुणे के बीच हाइपरलूप लिंक आरंभ करने की स्वीकृति दी। 
  • यह मुंबई के बी.के.सी. से पुणे के वाकड स्टेशन तक लगभग 117.5 किलोमीटर की दूरी तय करेगी। 
  • इस प्रोजेक्ट में हाइपरलूप वाहन की रफ्तार 496 किलोमीटर प्रति घंटा रहेगी।

हाइपरलूप वाहन की विशेषता

  • हाईस्पीड ट्रेन से दो-तीन गुना अधिक तेजी से चलेगी।
  • हाइपरलूप पॉड ऑन-डिमांड होती है और बिना रुके गंतव्य तक पहुंचेगी।
  • इसका पर्यावरण पर प्रभाव बहुत कम होगा।
  • हाइपरलूप कम खर्चीला और अलग तकनीक है।

चुनौतियां

  • तेज रफ्तार से चलने पर इसमें इमरजेंसी ब्रेक लगाने में समस्या होगी।
  • यात्रियों के बीच इसकी स्वीकार्यता जैसे सवाल भी महत्वपूर्ण है।

उद्देश्य       

IIT Madras की टीम  'AVISHKAR'  का प्रयास ट्यूब और पॉड्स निर्माण की लागत को कम से कम करना है। जिससे भारत में परिवहन की गति तेज हो सके।











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