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सौ फीसदी अंक, क्या देते है नौकरी की गरंटी?

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सौ फीसदी अंक, क्या देते है नौकरी की गरंटी?



 रोशनी आज बहुत खुश है और थोड़ी बेचैन भी क्योकि कल उसका प्रतियोगी परीक्षा का परिणाम आने वाला है। कल उस सपने का सकार  होने का दिन है जो सपना उसके माता - पिता ने उसके पैदा होने से पहले से देखते आ रहे है। उसके पैदा होने के बाद उस सपने को रोशनी की जिंदगी का लक्ष्य बना दिया गया। कुरूक्षेत्र में एक योद्धा की तरह रोशनी भी अपने लक्ष्य को प्राप्त करने में सर्वश्व न्यौछावर कर चुकी है।

वो बचपन से लेकर आज तक सभी परीक्षाओं में प्रथम आई है। इस सरकारी नौकरी की परीक्षा को पास करने के लिए वो पिछले दो साल से तैयारी कर रही है। जो लड़की हर काम हमेशा अपने समय से करती थी, आज उसे नींद नहीं आ रही है। कल क्या परिणाम आयेगा इसी उधेड़बुन में सुबह हो गयी। घड़ी की सुई परिणाम के आने का इशारा कर रही थी। परिणाम देखकर उसे विश्वास नहीं हो रहा कि उसके पूरे सौ फीसदी अंक आये है।

दो महीने बाद अंतिम चयन सूची घोषित हुई तो उसका नाम नहीं था। सामान्य श्रेणी का उम्मीदवार किसी नौकरी के लिए लिखित परीक्षा में सौ फीसदी अंक प्राप्त करता है तो भी इस बात की गरंटी नहीं है कि उम्मीदवार का चयन किया जायेगा।

रोशनी ने इस अन्याय के विरुद्ध कोर्ट की शरण ली। इस याचिका में कहा गया है कि प्रतियोगी परीक्षा में शत-प्रतिशत अंक प्राप्त करने के बाद भी उसे नौकरी से वंचित करना समानता के संवैधानिक अधिकार का उल्लंघन है। रोशनी के वकील की दलील है कि समाजिक आर्थिक मानदंड पर आरक्षण प्रदान करने वाली सरकार की अधिसूचना संवैधानिक प्रावधानों के खिलाफ है जो योग्य अभियार्थियों के बजाय आयोग्य को वरीयता देती है।

रोशनी के वकील ने कोर्ट में अन्य बिंदुओं पर लोगो का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया

  • जो आरक्षण में अधिकृत हैं और जो आरक्षण से वंचित हैं दोनों की प्रतिभा की हानि का प्रमुख कारण सिद्ध हो रहा है।
  • वर्तमान आरक्षण व्यावस्था से दाेनों ही पक्षों की प्रतिभा की हानि हो रही है।
  • जितने व्यक्ति आरक्षण में अधिकृत कर लिए गए है, केंद्रीय और प्रांतीय शासनतंत्र उतनी नौकरियां देने में असमर्थ है।
  • जब अयोग्य व्यक्ति, योग्य व्यक्ति से ऊंचे पद पर स्थापित हो जाता है तो प्रतिशोध की भावना मन में उत्पन्न होती है।
  • अगर ये चारों दोष किसी देश में लंबे समय तक बने रहने से देश का विघटन होना तय है। जिसके चलते देश परतंत्रता की ओर अग्रसर हो जाता है।

जहां एक तरफ रोशनी जैसे न जाने कितने ही उम्मीदवार पूरे देश में होगे जो काबिल होते हुए भी मनचाही नौकरी नहीं कर पाते। तो वहीं दूसरी तरफ हम शिक्षा का विस्तार करके ऐसे बहुत से काबिल बेरोजगार युवा पैदा कर रहे है। 

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