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सोशल मीडिया का प्रभाव


सोशल मीडिया का प्रभाव 

सोशल नेटवर्किंग साइट पर बढ़ती सक्रियता रचनाशीलता पर डालती हैं प्रभाव


वर्तमान समय में प्रत्येक व्यक्ति किसी-न-किसी सोशल साइट पर एक्टिव हैं। इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि सोशल मीडिया का मंच आज अभिव्यक्ति का नया और कारगार माध्यम बन चुका है। लेकिन आज दूर बैठे रिश्तेदारों और दोस्तों से जोडऩे वाली यह सोशल नेटवर्किंग साइट्स युवाओं को तनाव, अशांति और क्रोध आदि जैसी मानसिक समस्याएं तो दे ही रही हैं। पर क्या आप जानते है कि इन साइट्स पर बढ़ती सक्रियता आपकी रचनाशीलता पर भी प्रभाव डाल रही हैं। फेसबुक और ट्विटर नए उभरते लेखकों को एक ऐसा मंच देता है जहां पर वो किसी भी विषय पर अपने विचार प्रकट कर सकते हैं। शायद इसी लिए ये साइट्स आज के युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय हैं। तो चलिए यह जानने की कोशिश करते है कि किस प्रकार से सोशल साइट्स पर बढ़ती सक्रियता आपकी रचनाशीलता पर प्रभाव ड़ालती हैं।

अतिसक्रियता कैसे प्रभावित करती हैं रचनाशीलता को
सोशल साइट्स पर दिन-प्रतिदिन लोगों की बढ़ती सक्रियता प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से हमारी रचनाशीलता को प्रभावित करती ही हैं। लेकिन हर बार यह नकारात्मक प्रभाव ही डालें यह भी आवश्यक नहीं है। हमारी लेखनी में इन साइट्स पर अतिसक्रियता का सकारात्मक प्रभाव भी साफतौर पर देखा जा सकता हैं।

नकारात्मक प्रभाव

  •  नए लेखकों के शुरूआती दौर में तो फेसबुक, ट्विटर आपके लिए सहायक है, क्योंकि यह आपके मनोबल को बढ़ाती है। पर बार-बार आपकी अनगढ़ या कच्ची रचना पर मिलने वाली वाहवाही आपकी लेखनी के स्तर को बढ़ाने में मददगार साबित नहीं रहेगी। 
  •  फेसबुक और ट्विटर पर लिखी जाने वाली रचनाओं पर कई बार आप से जुड़े लोग बस इसलिए लाइक या कमेंट कर देते है कि आप भी उनकी पोस्ट पर लाइक या कमेंट करें। मतलब एक हाथ लें, एक हाथ दें। जिसके कारण अपकी अनुचित रचना पर भी आपको सराहा जाता है, जिससे आपकी रचना का स्तर कभी बढ़ता ही नहीं। 
  •  आप जो फेसबुक या किसी अन्य सोशल साइट पर लिख रहें है उसकी आपको कोई पेमेंट न मिले। जो शायद आप किसी अखबार या पत्रिका में छपवाकर प्राप्त कर सकते हैं।

सकारात्मक प्रभाव

  • जिस प्रकार से लोगों में सोशल साइट्स का के्रज बढ़ रहा हैं। उसके मुताबिक आपकी रचना किसी बुक, अखबार या पत्रिका के मुकाबले इन साइट्स पर आपकों पाठक अधिक मिलेंगे।
  •  हम अपनी गलतियों से बहुत कुछ सीखते है, इसलिए जितने अधिक लोग अपनी रचना को पढ़ेगे उतने ही ज्यादा आपको अपनी कमियों के बारे में पता चलेगा। जिससे स्वाभाविक ही आप अपनी अगली रचना में उन गलतियों को दोहराएंगे नहीं।
  •  आप अपनी रचनाओं के जरिए कमाई भी कर सकते है। अगर आपके पेज के सब्सक्राइबर की संख्या करोड़ों में है तो आपके पेज पर हर कंपनी अपने एड देना चाहेगी। जो आपकी कमाई का जरिया बनेगी।
  •  आजकल बड़े-बड़े पब्लिशिंग हाउस एक बेहतर किताब की खोज में इन साइट्स का रुख भी करने लगे है। अगर आपकी रचनात्मकता में कुछ नवीनता, विषय की गंभीरता, भाषा पर पकड़ है तो आपको यह लोग स्वयं भीड़ में से खोज निकालेगे, और आपकी रचना को किताब की शक्ल देने में आपकी मदद करेगे।









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