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भारत की विरासत : आयुर्वेद पद्धति

भारत की विरासत : आयुर्वेद पद्धति 


           भारत की विरासत : आयुर्वेद पद्धति 




भारत की प्राचीन विरासत आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति देश का गौरव का प्रतीक  मानी  जाती है। जिन बीमारियों का इलाज एलोपेथी में भी संभव नहीं है , उसका इलाज आयुर्वेद में संभव है। आयुर्वेद ने अपनी खूबियों के चलते पूरे विश्व में अपना लोहा मनवा लिया है। जब भारत की धरोहर आयुर्वेद की शक्ति और इसके लाभ के बारे में पूरा विश्व मान चुका है तब भारत देश की नींद खुली कि यह तो भारतीय धरोहर है और इसके लाभ को लेने में ज्यादा देरी नहीं करनी चाहिए। देर से ही सही लेकिन देश ने आयुर्वेद की ताकत को जाना और इसके विकास के लिए कई ठोस कदम भी उठाएं  है।

धन्वंतरि जयंती या धनतेरस  के अवसर पर राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस के रूप में मानाने की पहल की गई है। इस पहल से लगता है कि सचमुच अच्छे दिन आ गए है जिसका वादा मोदी सरकार ने किया था। धन्वंतरि को हिन्दु धर्म के अनुसार दवाई का देवता माना जाता है। पुराणो में भी इनको आयुर्वेद का भगवान माना गया है।

समय के साथ सोच में परिवर्तन होता है परम्परा में नहीं। आयुर्वेद पद्धति सोच नहीं परम्परा है जो समय के साथ बदलेगी नहीं , पर हां उसमें वक़्त के साथ सुधार जरूर आ सकता है। आज भी घर के बड़े -बूढ़े अपनी बीमारी में अंग्रेजी दवाई लेने से मना करते है। उनके इस न के पीछे दवाई के डर के साथ ही अपने घरेलू नुस्खों पर विश्वास भी है , और इसी विश्वास से वो ठीक भी होते है।

अपनी विरासत को महफूस रखने के लिए यह जरुरी है कि इस दिशा की ओर केवल सरकार ही काम न करे बल्कि आज के यूथ को भी उस पर पूरा विश्वास हो और वो भी इसका प्रयोग करे। क्योकि किसी एक व्यक्ति के प्रयासों से ये संभव नहीं हो सकता इसके लिए जरुरी है की पूरे देश को अपना योगदान देना चाहिए।


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