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वक्त के साथ बदला भाईदूज

वक्त के साथ बदला भाईदूज




भाई-बहन के प्यार का पर्व है भाईदूज का त्यौहार। इस दिन बहने अपने भाई का तिलक करके आरती उतारती है। भाई भी अपनी बहन को उपहार देता है। भाई चाहे अपनी बहन से पूरे  साल दूर रहा हो पर इस दिन वह अपने सारे काम को छोड़कर अपनी बहन के पास आता है , और भाईदूज का त्यौहार मनाता है। पर वक्त के साथ बदल रहा है भाईदूज को मनाने का तरीका। 

* कई भाई बहन ऐसे भी है जो भाईदूज के दिन भी साथ नहीं रहते। उन्हें अब डिजिटल मीडिया ने एक कर दिया है। भाई बहन के बीच की दूरी को स्मार्टफोन ने मिटा दी है। 

पहले जब मम्मी मामा के घर जाती थी या बुआ पापा के घर भाईदूज के लिए आती थी तो वह मिठाई का डिब्बा साथ लाना कभी नहीं भूलती थी। पर समय के साथ मिठाई के इस डिब्बे में भी बदलाव आया है। आज की मॉर्डन बहने अपने भाईयों को मिठाई खिलाने से ज्यादा बेहतर उन्हें ड्राय-furit और चॉकलेट्स खिलाना पसंद करती है। इससे न केवल मिलावटी मिठाई के नुकसान से बचा जा सकता है , बल्कि यह आजकल के फैशन के अनुरूप भी है। 

पापा अपनी बहन को भाईदूज के अवसर पर भेंट स्वरूप अपना प्यार देते थे। लेकिन आज के मॉर्डन समय में भाईदूज की पहचान ही गिफ्ट ने ले ली है। बहनें एक हफ्ता पहले ही भाई को तोहफों की लिस्ट पकड़ा देती है और भाई भी उस लिस्ट की हर चीज बहन की ला कर देने की कोशिश करता है। 

भाईदूज के अवसर पर भाई-बहन घर पर बने पकवानों का लुफ्त उठाते थे , जो पकवान मम्मी बनाती थी।  आज इन व्यंजनों की जगह होटल के खानों ने ले ली है। वक्त चाहे जितना भी बदल जाए पर भाई-बहन के प्यार का स्वरूप नहीं बदल सकता। पहले भी भाई के आखों का तारा होती थी बहनें और आज भी है और कल भी रहेगी। 

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