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Showing posts from July, 2021

भारत में हाइपरलूप तकनीक की उपयोगिता

भारत में हाइपरलूप तकनीक की उपयोगिता हाइपरलूप क्या है? हाइपरलूप वाहनों का विचार परिवहन के पांचवें विकल्प के तौर पर सामने आया है। हाइपरलूप वैक्यूम  ट्यूब के अंदर वाहन चलाने की अवधारणा है। जिसमें हवा और अन्य प्रतिरोध कम होने के चलते वाहन को कम उर्जा में तीव्रतम गति से चलाया जा सकता है। पूरी दुनिया में लोग इस त्वरित और ज्यादा सुरक्षित परिवहन को व्यावहारिक बनाने में काम कर रहे ंहै।  आत्मनिर्भर भारत की ओर बढ़ते कदम   IIT Madras के Centre for Innovation के  'AVISHKAR'  हाइपरलूप टीम इस दिशा अग्रणी कही जा सकती है।  'AVISHKAR' एकमात्र एशियाई टीम है जो भारत में स्वचलित हाइपरलूप पॉड के स्वदेशी डिजाइन और विकास पर काम कर रही है। इस टीम ने 2019 में अंतरराष्ट्रीय स्पेसएक्स हाइपरलूप पॉड प्रतियोगिता में फाइनल में पहुंची थी। 19 जुलाई से शुरू हुई यूरोपियन हाइपरलूप वीक में टीम  'AVISHKAR' हाइपरलूप भाग ले रही है। इस प्रतियोगिता के लिए 40 छात्रों की टीम ने कोरोना महामारी के दौरान नवीन प्रोटाेटाइप हाइपरलूप पॉड विकसित किया है। यह पॉड चेन्नई से बेंगलूरु की दूरी मा...

सावन मास का महत्व

सावन मास का महत्व सावन मास भगवान शिव को समर्पित हैं। इस पवित्र महीने में भोले बाबा के भक्त उन्हे प्रसन्न करने के लिए विशेष पूजा अर्चना करते है। सावन मास को सर्वोत्त्म मास भी कहते है। सावन सोमवार व्रत का सर्वाधिक महत्व है। श्रावस मास भगवान भोलेनाथ को सबसे प्रिय है। इस माह में सोमवार का व्रत और सावन स्नान की परंपरा है। श्रावण मास में बेलपत्र से भगवान भोलेनाथ की पूजा करना और उन्हें जल चढ़ाना अति फलदायी माना गया है। जल अभिशेष का सावन मास में विशेष   महत्व   जब   समुद्र मंथन आरम्भ हुआ और भगवान कच्छप के एक लाख   योजन   चौड़ी पीठ पर मन्दराचल पर्वत घूमने लगा। तब समुद्र मंथन से सबसे पहले हलाहल विष निकला। उस विष की ज्वाला से सभी देवता तथा दैत्य जलने लगे और उनकी कान्ति फीकी पड़ने लगी। इस पर सभी ने मिलकर भगवान शंकर की प्रार्थना की। उनकी प्रार्थना पर   महादेव   जी उस विष को हथेली पर रख कर उसे पी गये किन्तु उसे कण्ठ से नीचे नहीं उतरने दिया। उस   कालकूट   विष के प्रभाव से शिवजी का कण्ठ नीला पड़ गया। इसीलिये महादेव जी को   नीलकण्ठ   कहते हैं। उ...